यद्युत्तरोत्तराभावे पूर्वपूर्वं तु निष्फलम्।
निवृत्तिः परमा तृप्तिरानन्दोऽनुपमः स्वतः ॥
उपर्युक्त वस्तुओं में जो उत्तरोत्तर न हो, उससे पूर्व की वस्तु निष्फल है। विषयों से निवृत्ति ही परम तृप्ति है और आत्मा का आनन्द स्वयं ही अनुपम है।
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