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अध्यात्म • अध्याय 1 • श्लोक 27
चित्तमूलो विकल्पोऽयं चित्ताभावे न कश्चन। अतश्चित्तं समाधेहि प्रत्यग्रूपे परात्मनि ॥
इस विकल्प (भेद) का मूल कारण चित है। यदि चित्त न हो, तो कोई भी विकल्प नहीं है। अतः प्रत्यग् रूप परमात्मा में अपने चित्त को सम्माधिस्थ (समाहित) कर दो।
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