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अध्यात्म • अध्याय 1 • श्लोक 19
अत्रात्मत्वं दृढीकुर्वन्त्रहमादिषु संत्यजन्। उदासीनतया तेषु तिष्ठेद्धटपटादिवत् ॥
आत्मत्व अर्थात् आत्मभाव को दृढ़ करके, अहंकारादि का परित्याग करके उनसे उसी प्रकार से उदासीन रहे, जिस प्रकार बरतन वस्त्रादि के प्रति उदासीन भाव रखा जाता है।
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