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अध्यात्म • अध्याय 1 • श्लोक 17
जीवतो यस्य कैवल्यं विदेहोऽपि स केवलः । समाधिनिष्ठतामेत्य निर्विकल्पो भवानघ ।।
जिसे जीवित स्थिति में ही कैवल्यावस्था प्राप्त हो गयी हो, वह विदेह (देहरहित) होने पर केवल (ब्रह्म) ही रहेगा। इसलिए हे निष्पाप! समाधिनिष्ठ होकर निर्विकल्प (विकल्परहित ) बनो।
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