हे निष्पाप! जिस प्रकार (छोटे से, किन्तु स्वच्छ) दर्पण में (विशाल) पुर (नगर) दिखाई देता है, उसी प्रकार अपने को 'मैं ब्रह्म हूँ.' ऐसा जानकर कृतार्थ हो (जाये)।
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