अदिति:--
बेटी, पति की अत्यन्त प्रिय होओ और यह चिरञ्जीवी बालक (माता और पिता) दोनो कुलों को आनन्दित करने वाला होवे । तुम सब बैठो ।
(सभी प्रजापति कश्यप के चारो ओर बेठ जाते हैं)
कश्यप:--
(प्रत्येक को निर्देश करते हुये) यह साध्वी (पतिव्रता) शकुन्तला है। यह सगुणों से युक्त (सगुण-सम्पत्र) पुत्र (सर्वदमन) है। यह आप (राजा दुष्यन्त) हैं। (इस प्रकार) सौभाग्य से श्रद्धा, वित्त और विधि - ये तीनों वस्तुयें एक स्थान पर मिल गयी हैं।
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