मातलि:--
और क्या (अर्थात् बिल्कुल ठीक है)।
राजा:--
(समीप में जाकर) आप दोनों को इन्द्र का आज्ञाकारी दुष्यन्त प्रणाम करता है।
कश्यप:--
बेटा, दीर्घजीवी होओ (बहुत दिनों तक जीओ)। और पृथ्वी का पालन करो।
अदितिः--
बेटा, अद्वितीय महारथी होओ।
शकुन्तला:--
पुत्र के साथ मैं आप दोनों के चरणों की वन्दना करती हूँ।
कश्यप:--
बेटी, तुम्हारे) पति (दुष्यन्त) इन्द्र के सामान (हैं) पुत्र (सर्वदमन) (इन्द्र-पुत्र) जयन्त के समान (है) तुम पुलोमा की पुत्री (अर्थात् इन्द्राणी) के समान बनो । (इसके अतिरिक्त) दूसरा आशीर्वाद तुम्हारे योग्य नहीं है ।
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