शकुन्तला:--
जय हो, आर्यपुत्र की जय हो । (आधा ही कहने पर आंसुओं से गला भर जाने के कारण रुक जाती है)।
राजा:--
(गले में) आंसू के कारण जयशब्द के रोक लिये जाने पर भी मैंने (एक प्रकार से) विजय प्राप्त कर ली, क्योकि बिना प्रसाधन (सजावट) के भी लाल ओटों से युक्त तुम्हारा मुख देख लिया ।
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