पहली:--
बेटा, इस सिंह के वच्चे को छोड़ दो मैं तुमको दूसरा खिलोना दूंगी ।
बालक:--
कहाँ है ? (खिलौना मुझको) दो । (हाथ फैलाता है) ।
राजा:--
(बालक के हाथ को देखकर) क्या यह चक्रवर्ती के लक्षणों को धारण कर रहा है ? क्योकि इसका लुभावनी वस्तु (खिलौने) के लिये प्रेम (अथवा अभिलाषा) के कारण फैलाया गया और जाल के समान गुंथी हयी उंगलियों वाला इस (बालक) का हाथ, ऐसा सुशोभित हो रहा है, जैसे बड़ी हुई लालिमा से युक्त नवीन उषा के द्वारा विकसित किये गये और अदृष्टि गोचर पह्लुडियों के मध्यभाग से युक्त (अर्थात् जिसकी पह्लुडियों का मध्यभाग नहीं दिखायी पड़ रहा है ऐसा) अद्वितीय कमल हो ।
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