मातलि:--
इतनी ही इन्द्र (के रथ) की आप (के रथ) से विशेषता (अन्तर) है ।
राजा:--
हे मातलि, मरीचि के पुत्र (कश्यप, मारीचि) का आश्रम किस प्रदेश में (स्थान पर) है ?
मातलि:--
(हाथ से दिखाता हुआ) बिमोट-बांबी से आच्छादित (ढके हुये) आधे शरीर वाले, लिपटी हुयी साँप की केंचुल वाली छाती से युक्त, पुरानी लताओं के तन्तुओं के समूह (के लिपट जाने) के कारण गले में अत्यधिक पीड़ित और कंधों तक फैले हुये तथा पक्षियों के घोंसले से व्याप्त (परिपूर्ण) जटाओं के समूह को धारण करते हुये ठूंठ की भाँति निश्चल ये मुनि जहां पर सूर्य-मण्डल की ओर (मुख कर) स्थित है । (वही कश्यप ऋषि का आश्रम है) ।
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