सानुमती:--
(राजा को देखकर) परित्याग के द्वारा अपमानित हुई भी शकुन्तला इस (राजा दुष्यन्त) के लिये दुःखित रहती है, यह ठीक ही है ।
राजा:--
(ध्यान-मग्न धीरे-धीरे चारो ओर घूमकर) पहले मृगनयनी प्रिय (शकुन्तला) के द्वारा जगाया जाता हुआ (याद दिलाया जाता हुआ) भी सोया हुआ (विस्मृतिग्रस्त) यह अभागा हृदय अब पश्चाताप दुःख (भोगने) के लिये जाग गया (होश में आया) है ।
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