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अभिज्ञानशाकुन्तलम् • अध्याय 6 • श्लोक 32
विदूषकः--यद्‌ भवनाज्ञापयति । (इति निष्क्रान्तः) । मातलिः- आयुष्मान्‌ रथमारोहतु । (राजा रथाधिरोहणं नाटयति) (इति निष्क्रान्ताः सर्वे) ।। इति षष्ठोऽङ्कः ।।
विदूषक:-- आप जो आज्ञा देते हैं । (निकल जाता है) । मातलि:-- चिरंजीवी (आप रथ पर चढ़ें) । (राजा रथ पर चढ़ने का अभिनय करते हैं) (सभी निकल जाते हैं) ॥ षष्ठ अंक समाप्त ॥
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