सानुमती:--
पहली और बाद की घटना का विरोधी यह विरहमार्ग निराला (अपूर्व) है । अर्थात् यह विरह का मार्ग आगे और पीछे की बातों से तालमेल न रखने वाला अपूर्व है ।
राजा:--
हे मित्र, क्यों इस प्रकार निरन्तर (कभी शान्त न होने वाले, अविश्रान्त) दुःख का अनुभव कर रहा हूँ? (रात भर) जागते रहने के कारण उस (शकुन्तला) का स्वप्न में समागम (मिलन) अवरुद्ध हो गया है और आंसू चित्रस्थित भी इस (शकुन्तला) को देखने नहीं देता है ।
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