विदूषक:--
(अपने मन में) जैसा मैं देख रहा हूँ कि इनके द्वारा यह चित्रपट लम्बी दाढ़ी वाले तपस्वियों के झुंड से भर दिया जायेगा ।
राजा:--
हे मित्र, ओर भी । शकुन्तला की जो सजावट हम करना चाहते थे, वह यहाँ (चित्र में) भूल ही गये हैं ?
विदूषक:--
वह क्या ?
सानुमती:--
जो वनवास, सुकुमारता और विनय के अनुकूल होगा ।
राजा:--
हे मित्र, कानों मे संलप्र डण्ठल वाला और कपोलों तक लटकते हुये केसर (पराग) वाला शिरीष (शिरस) का पुष्प नहीं चित्रित किया गया है तथा स्तनों के बीच में शरद् ऋतु के चन्द्रमा की किरणों के समान कोमल कमल-नाल का हार (भी) नहीं रचा गया (बनाया गया) है ।
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