शा्ङ्गरव:--
जब आप अन्य (रानियों) में आसक्त हो जाने के कारण पहले ही घटना को भूल गये हैं तब अधर्म से डरने वाले कैसे (हैं) ?
राजा:--
(पुरोहित के प्रति) आप से ही इस विषय में उचित-अनुचित पूछ रहा हूँ । मैं विवेकहीन हो रहा हूँ (अर्थात् मैं ही भूल रहा हूँ) अथवा यह (स्त्री) झूठ बोल रही है - इस प्रकार का सन्देह होने पर मैं पत्नी-परित्यागी होऊं (बनू) अथवा परख (दूसरे की स्त्री) के स्पर्श से दूषित (होऊं) ।
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