राजा:--
हे महानुभाव, इन आदरणीय (शकुन्तला) (की बातें) पर विश्वास कर लेने के कारण दोषयुक्त शब्दों के द्वारा हमें क्यों दुःखित कर रहे हो ?
शाङ्खरव:--
(ईष्यापूर्वक) सुन लिया गया, आप लोगो के द्वारा (दिया गया) यह नीचता पूर्ण उत्तर । (अर्थात् सुन लिया, आप लोगों का नीचतापूर्ण उत्तर) । जिसने जन्म से लेकर (आज तक) धूर्तता (शठता) को नहीं सीखा है, उस व्यक्ति का वचन (कथन) अप्रामाणिक (प्रमाणरहित) है और जो "दूसरों को धोखा देना विद्या (कला) है" - ऐसा (मानकर उसे) सीखते हैं, वे ही सत्य वचन बोलने वाले (प्रामाणिक वचन वाले) हैं ?
पूरा ग्रंथ पढ़ें
अभिज्ञानशाकुन्तलम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
अभिज्ञानशाकुन्तलम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।