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अभिज्ञानशाकुन्तलम् • अध्याय 4 • श्लोक 9
(कोकिलरवं सूचयित्वा) अनुमतगमना शकुन्तला तरुभिरियं वनवासबन्धुभिः । परभृतविरुतं कलं यथा प्रतिवचनीकृतमेभिरीदृशम्‌ ।।
(कोकिल के शब्द को (सुनने की सूचना देकर) अभिनयकर) इस शकुन्तला को वनवास के बन्धु (साथी) वृक्षों द्वारा (पतिगृह) जाने के लिये अनुमति मिल गयी है । क्योकि मनोहर कोयल के शब्द (कूक) को इन (वृक्षों) के द्वारा इस प्रकार प्रत्युत्तर बनाया गया है (अर्थात्‌ इन वृक्षों ने कोयल की कूक द्वारा शकुन्तला को पतिगृह जाने के लिये प्रकारान्तर से अनुमति दे दी है)।
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