(घूमकर और देखकर) बेंत से घिरे हए इस लतामण्डप में शकुन्तला को होना चाहिये । क्योकि पीले बालू (रेत) वाले इस (लतापमण्डप) के द्वार पर आगे की ओर उठी हुई (उभरी हुई) और नितम्बों के भार के कारण पीछे की ओर गहरी (धंसी हुई) नयी (अभी-अभी बनी हुई) पदचिन्हों की पंक्ति दिखायी दे रही है ।
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