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अभिज्ञानशाकुन्तलम् • अध्याय 2 • श्लोक 18
(विचिन्त्य) सखे, त्वमम्बया पुत्र इति प्रतिगृहीतः । अतो भवानितः प्रतिनिवृत्य तपस्विकार्यव्यग्रमानसं मामावेद्य तत्रभवतीनां पुत्रकृत्यमनुष्ठातुमर्हति । विदूषकः- न खलु मां रक्षोभीरुकं गणयसि । राजा-- (सस्मितम्‌) कथमेतद्‌ भवति सम्भाव्यते ? विदूषकः-- यथा राजानुजेन गन्तव्यं तथा गच्छामि । राजा- ननु तपोवनोपरोधः परिहरणीय इति सर्वाननुयात्रिकास्त्वयैव सह प्रस्थापयामी । विदूषकः- (सगर्वम्‌) तेन ही युवराजोऽस्मीदानीं संवृत्तः । राजा- (स्वगतम्‌) चपलोऽयं वटुः । कदाचिदस्मत्मार्थनामन्तः पुरेभ्यः क थयेत्‌। भवतु । एनमेवं वश्ये । (विदूषकं हस्ते गृहीत्वा । प्रकाशम्‌) वयस्य, ऋषिगौरवादाश्रमं गच्छामि । न खलु सत्यमेव तापसकन्यकायां ममाभिलाषः । पञ्य-- क्व॒ वयं क्व परोक्षमन्मथो मृगशावैः सममेधितो जनः । परिहासविजल्पितं सखे परमार्थेन न गृह्यतां वचः !।
(सोचकर) मित्र, (मेरी) माता के द्वारा तुम (भी) पुत्र की भाँति स्वीकार किये गये हो। (अर्थात्‌ मेरी माता तुम्हें पुत्र की तरह मानती है) । इसलिये आप (तुम) यहाँ से लौटकर मुझको तपस्वियो के कार्य मे व्यस्त मन वाला बताकर पूज्य माता के पुत्र-कार्य को सम्पन्न कर देना । विदूषक:-- मुझको राक्षसों से भयभीत तो नहीं गिन रहे (समझ रहे) हो (जिससे मुझे राजधानी भेज रहे हो) । राजा:-- (मुस्कराकर) आप के विषय में यह कैसे सम्भव हो सकता है ? विदूषक:-- (तब तो) जिस प्रकार राजा के अनुज को जाना चाहिये उसी प्रकार जाऊंगा । राजा:-- निश्चय ही तपोवन की बाधा बचानी चाहिये (अर्थात्‌ तपोवन में विध्न नहीं होना चाहिए), इसलिए सभी अनुयायियों को तुम्हारे साथ ही भेजता हूँ । विदूषक:-- (गर्व के साथ) तब तो अब मैं युवराज (राजकुमार) हो गया हूँ । राजा:-- (अपने मन में) यह ब्राह्मण-बालक चंचल है । कहीं (शकुन्तला विषयक) हमारी इच्छा (प्रार्थना) को अन्तःपुर की रानियों से (न) कह दे ! अच्छा, इससे इस प्रकार कहता हूँ । (विदूषक को हाथ से पकड़ कर प्रकट रूप से) मित्र, ऋषियों के महत्व (गौरव) के कारण आश्रम को जा रहा हूँ । वस्तुतः तापसकन्या (शकुन्तला) में मेरी इच्छा (आसक्ति) नही है । देखो मित्र, (भोग-विलास में आसक्त) हम लोग कहाँ ! और हरिण के बच्चों के साथ बढ़ा हुआ (पला हुआ), काम-वासना से अपरिचित (शकुन्तलारूपी) व्यक्ति कहाँ !! (अतः) हंसी (उपहास) मे कही गयी (मेरी) बात को सही रूप में न ग्रहण कर लेना (अर्थात्‌ मेरी बात यथार्थ न समझ लेना) ।
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