(इसके बाद् हरिण का पीछा करते हये, बाण चढ़ा हुआ धनुष हाथ मे लिये हुये राजा ओर सारथि रथ पर बैठे हुये प्रवेश करते है) ।
सूत:-
(राजा ओर हरिण को देखकर) चिरञ्जीविन्, कृष्णसार हरिण और चढ़ी हुई प्रत्यंचा वाले धनुष से युक्त आप (दुष्यन्त) के ऊपर दृष्टिपात करता हुआ (मैं) मानों हरिण का पीछा करते हुये साक्षात् धनुर्धारी शिव को देख रहा हूं।
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