नटी:--
आर्य यह ऐसा ही है (अर्थात् आप का कथन ठीक है) अब इसके बाद के करणीय कार्य के विषय मे आदेश दीजिये ।
सूत्रधारः--
इस सभा के (सदस्यो के) कानों (श्रुति) को प्रसन्न करने के अतिरिक्त ओर क्या (करना) है? इसलिये शीघ्र ही आरम्भ हुए (जलस्नानादि के द्वारा) उपभोग के योग्य इस ग्रीष्म ऋतु के विषय में (ही) गाओ । क्योकि इस समय सुखकर (अच्छा) लगता है जल में स्नान करना जिनमे, गुलाबो (पाटल) के सम्पर्क से सुगन्धित हो जाता है बन का पवन जिनमे, सघन (घनी) छाया मे सरलता से आती है नींद जिनमे, ऐसे (गर्मी के) दिन सायं काल में मनोहर (होते हैं) ।
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