इसलिये (राजन् !) धनुष पर अच्छी प्रकार चढ़ाये गये बाण को उतार लीजिये । आप का शस्त्र पीड़ितों की रक्षा के लिये (है), निरपराध पर प्रहार करने के लिये नहीं (है) ।
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