समस्त जगत् के उपादान कारण और आधाररूप परमेश्वर में ही सृष्टि, स्थिति और लय होते हैं, जैसे जल में बुलबुले उत्पन्न होते हैं, स्थित रहते हैं और उसी में लीन हो जाते हैं।
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