मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
आत्मबोध • अध्याय 1 • श्लोक 8
उपादानेऽखिलाधारे जगन्ति परमेश्वरे। सर्गस्थितिलयान्यान्ति बुद्बुदानीव वारिणि।।
समस्त जगत् के उपादान कारण और आधाररूप परमेश्वर में ही सृष्टि, स्थिति और लय होते हैं, जैसे जल में बुलबुले उत्पन्न होते हैं, स्थित रहते हैं और उसी में लीन हो जाते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
आत्मबोध के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

आत्मबोध के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें