यद्यपि आत्मा शुद्ध चैतन्य है और सदैव सर्वत्र विद्यमान है, फिर भी वह केवल ज्ञान-चक्षु से ही अनुभव की जाती है: परन्तु जिसकी दृष्टि अज्ञान से धुँधली है, वह उसे नहीं देख पाता; जिस प्रकार अन्धा तेजोमय सूर्य को नहीं देख पाता।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
आत्मबोध के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।