मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
आत्मबोध • अध्याय 1 • श्लोक 64
दृश्यते श्रूयते यद्यद्ब्रह्मणोऽन्यन्न तद्भवेत्। तत्त्वज्ञानाच्च तद्ब्रह्म सच्चिदानन्दमद्वयम्।।
जो कुछ भी देखा या सुना जाता है, वह ब्रह्म से भिन्न नहीं है। तत्त्वज्ञान से यह स्पष्ट होता है कि वही ब्रह्म है, जो सत्-चित्-आनन्द और अद्वय स्वरूप है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
आत्मबोध के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

आत्मबोध के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें