तद्युक्तमखिलं वस्तु व्यवहारश्चिदन्वितः।
तस्मात्सर्वगतं ब्रह्म क्षीरे सर्पिरिवाखिले।।
समस्त पदार्थ ब्रह्म से व्याप्त हैं। ब्रह्म के कारण सभी क्रियाएं संभव हैं: इसलिए ब्रह्म हर चीज में व्याप्त है जैसे मक्खन दूध में व्याप्त है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
आत्मबोध के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।