यद्दृष्ट्वा नापरं दृश्यं यद्भूत्वा न पुनर्भवः।
यज्ज्ञात्वा नापरं ज्ञेयं तद्ब्रह्मेत्यवधारयेत्।।
जिसको जान लेने पर कुछ और देखने योग्य शेष नहीं रहता, जिसके हो जाने पर पुनः जन्म नहीं होता, और जिसे जान लेने पर कुछ और जानने योग्य नहीं बचता—वही ब्रह्म है, ऐसा निश्चय करना चाहिए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
आत्मबोध के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।