परमात्मा में "ज्ञाता", "ज्ञान" और "ज्ञान की वस्तु" जैसे कोई भेद नहीं हैं। अनंत आनंदस्वरूप होने के कारण वह अपने भीतर ऐसे भेदों को स्वीकार नहीं करता। यह अकेला ही अपने आप चमकता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
आत्मबोध के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।