मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
आत्मबोध • अध्याय 1 • श्लोक 36
नित्यशुद्धविमुक्तैकमखण्डानन्दमद्वयम्। सत्यं ज्ञानमनन्तं यत्परं ब्रह्माहमेव तत्।।
मैं वही हूँ जो नित्य, शुद्ध, मुक्त, एक, अखण्ड, आनन्दस्वरूप और अद्वय है। मैं वही परब्रह्म हूँ जो सत्य, ज्ञानस्वरूप और अनन्त है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
आत्मबोध के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

आत्मबोध के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें