अमनस्त्वान्न मे दुःखरागद्वेषभयादयः।
अप्राणो ह्यमनाः शुभ्र इत्यादिश्रुतिशासनात्।।
मैं मन से रहित होने के कारण दुःख, राग, द्वेष और भय आदि से मुक्त हूँ। श्रुति के अनुसार आत्मा प्राणरहित और मनरहित, तथा शुद्ध है।
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