मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
आत्मबोध • अध्याय 1 • श्लोक 31
आविद्यकं शरीरादि दृश्यं बुद्बुदवत्क्षरम्। एतद्विलक्षणं विद्यादहं ब्रह्मेति निर्मलम्।।
अविद्या से उत्पन्न शरीर आदि दृश्य जगत बुलबुले के समान क्षणभंगुर है। इससे भिन्न, निर्मल स्वरूप को यह जानना चाहिए कि मैं ब्रह्म हूँ
पूरा ग्रंथ पढ़ें
आत्मबोध के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

आत्मबोध के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें