अविद्या से उत्पन्न शरीर आदि दृश्य जगतबुलबुले के समान क्षणभंगुर है। इससे भिन्न, निर्मल स्वरूप को यह जानना चाहिए कि मैं ब्रह्म हूँ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
आत्मबोध के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।