जब बुद्धि में राग, इच्छा, सुख और दुःख आदि वृत्तियाँ होती हैं, तभी उनका अनुभव होता है। सुषुप्ति में ये नहीं रहते और उनके न रहने पर भी आत्मा का अस्तित्व बना रहता है। इसलिए ये सब बुद्धि के धर्म हैं, न कि आत्मा के।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
आत्मबोध के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।