सदा सर्वगतोऽप्यात्मा न सर्वत्रावभासते।
बुद्धावेवावभासेत स्वच्छेषु प्रतिबिम्बवत्।।
यद्यपि आत्मा सदा सर्वव्यापक है, फिर भी वह सर्वत्र स्पष्ट रूप से प्रकट नहीं होता। वह केवल शुद्ध बुद्धि में ही उसी प्रकार प्रकाशित होता है, जैसे स्वच्छ दर्पण में प्रतिबिम्ब स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
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