सदा सर्वगतोऽप्यात्मा न सर्वत्रावभासते।
बुद्धावेवावभासेत स्वच्छेषु प्रतिबिम्बवत्।।
आत्मा सर्वव्यापी होते हुए भी प्रत्येक वस्तु में प्रकाशित नहीं होती। वह केवल आंतरिक उपकरण, बुद्धि (बुद्धि) में प्रकट होता है: जैसे एक स्वच्छ दर्पण में प्रतिबिंब।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
आत्मबोध के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।