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यमगीता Book Cover

यमगीता

यम के दूत किन मनुष्यों से सदैव दूर ही रहते हैं - इस गीता में स्वयं यमराज द्वारा अपने दूतों को यह बताया गया है। सच्चे भक्तों के लक्षण बताने के उपक्रम में जो सदाचारविषयक चर्चा इसमें की गयी है; वह अत्यन्त प्रभावी होने के साथ भगवान्‌ के किसी भी स्वरूप के उपासक के लिये सहज ग्रह्य हो सकती है।
ग्रंथकार: व्यास
अध्याय: 1
शास्त्र परिचय
यमगीता नाम से पुराण-वाडन्मय में कई गीताएँ मिलती हैं। श्रीविष्णुपुराण के अन्तर्गग समाहित यमगीता उन्हीं में से एक है। यम के दूत किन मनुष्यों से सदैव दूर ही रहते हैं - यही इस लघु कलेवर वाली गीता में स्वयं यमराज द्वारा अपने दूतों को बताया गया है। सच्चे भक्तों के लक्षण बताने के उपक्रम में जो सदाचारविषयक चर्चा इसमें की गयी है; वह अत्यन्त प्रभावी होने के साथ भगवान्‌ के किसी भी स्वरूप के उपासक के लिये सहज ग्रह्य हो सकती है। वस्तुत: एक सनातन ब्रह्म ही विभिन रूपों में अभिव्यक्त है। अवएव विष्णुभक्त पद से भक्तमात्र का तात्पर्य लेना चाहिये। सरल-सुबोध परंतु मार्मिक भाषा-शैली में निबद्ध कल्याणकारी इस यमगीता कों यहाँ सानुवाद प्रस्तुत किया जा रहा है।
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