वैशेषिकसूत्र कणाद मुनि द्वारा रचित वैशेषिक दर्शन का मुख्य ग्रन्थ है। कणाद ने वैशेषिकसूत्र में द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष और समवाय नामक छः पदार्थों का निर्देश किया है।
वैशेषिकसूत्र कणाद मुनि द्वारा रचित वैशेषिक दर्शन का मुख्य ग्रन्थ है। इस पर अनेक टीकाएं लिखी गयीं जिसमें प्रशस्तपाद द्वारा रचित पदार्थधर्मसङ्ग्रह प्रसिद्ध है। कणाद ने वैशेषिकसूत्र में द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष और समवाय नामक छः पदार्थों का निर्देश किया है। बाद में प्रशस्तपाद प्रभृति भाष्यकारों ने प्रायः कणाद के मन्तव्य का अनुसरण करते हुए पदार्थों का विश्लेषण किया।
वैशेषिकसूत्र में दस अध्याय हैं। प्रत्येक अध्याय में दो आहितिक हैं। इसमें कुल ३७० सूत्र हैं।
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