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वैराग्य संदीपनी Book Cover

वैराग्य संदीपनी

वैराग्य संदीपनी का अर्थ है ‘वैराग्य की प्रकाशिका’ एवं इसका विषय, नाम के अनुसार ही वैराग्योपदेश है। इसलिए यह पुस्तक बताती है कि कोई व्यक्ति कितनी आसानी से भक्ति एवं संत सङ्गति से स्थायी आध्यात्मिक सुख प्राप्त कर सकता है।
ग्रंथकार: तुलसीदास
अध्याय: 1
शास्त्र परिचय
तुलसीदास जी की इस रचना में ४८ दोहे और सोरठे तथा १४ चौपाई की चतुष्पदियाँ हैं। वैराग्य संदीपनी का अर्थ है ‘वैराग्य की प्रकाशिका’ एवं इसका विषय, नाम के अनुसार ही वैराग्योपदेश है। इसलिए यह पुस्तक बताती है कि कोई व्यक्ति कितनी आसानी से भक्ति एवं संत सङ्गति से स्थायी आध्यात्मिक सुख प्राप्त कर सकता है।
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