वैराग्य संदीपनी
वैराग्य संदीपनी का अर्थ है ‘वैराग्य की प्रकाशिका’ एवं इसका विषय, नाम के अनुसार ही वैराग्योपदेश है। इसलिए यह पुस्तक बताती है कि कोई व्यक्ति कितनी आसानी से भक्ति एवं संत सङ्गति से स्थायी आध्यात्मिक सुख प्राप्त कर सकता है।
ग्रंथकार: तुलसीदास
अध्याय: 1