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तुलसी Book Cover

तुलसी

इस उपनिषद् में तुलसी के आध्यात्मिक गुणों को उजागर किया गया है। अन्त में इस उपनिषद् की फलश्रुति बताते हुए, इसे पूर्णता प्रदान की गई है।
ग्रंथकार: ज्ञात नहीं
अध्याय: 1
शास्त्र परिचय
परवर्ती कालीन उपनिषदों में एक 'तुलसी' उपनिषद् भी है। 'तुलसी' चिरपरिचित एक पौधा है, जो आस्तिक-नास्तिक दोनों के लिए ग्राहा है। आस्तिक जन बड़ी श्रद्धा से 'तुलसी का पौधा' आरोपित करते हैं, उसमें देवी भाव रखते हुए नित्य प्रति खान, गन्ध, पुष्प, धूप-दीप आदि से पूजन करते हैं- आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। नास्तिक जन पूजा-पाठ भले ही न करें, परन्तु तुलसी की औषधीय गुणों के कारण इसकी उपयोगिता अवश्य स्वीकार करते हैं। इस उपनिषद् में तुलसी के आध्यात्मिक गुणों को उजागर किया गया है। सर्वप्रथम इस उपनिषद् के ऋषि, देवता, छन्द आदि का वर्णन है, तदुपरान्त उसकी महिमा का प्रतिपादन है। तुलसी का पंचांग (मूल, तना, पत्र, पुष्प, बीज) सेवन रोगोपचार एवं आध्यात्मिक गुणों के विकास में नितान्त उपयोगी है। रात्रि में, पर्वकाल में इसके पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। इसे अमृतरूपा एवं पापनाशिनी कहा गया है। यह भगवान् विष्णु को अतीव प्रिय है। अन्त में इस उपनिषद् की फलश्रुति बताते हुए, इसे पूर्णता प्रदान की गई है।
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