शिव संहिता
इस में पांच अध्याय हैं। पहले में ज्ञान, दूसरे अध्याय में नाड़ी संस्थान, तीसरे अध्याय में पांच प्राण उप प्राण आसन व प्राणायाम, चौथा अध्याय मुद्रा प्रधान है व साधक की घट परिचय निष्पत्ति आदि अवस्था का वर्णन हैं। पांचवे में 200 सेे अधिक श्लोक हैं, इसमें साधक प्रकार व सप्त चक्रों का विस्तृत वर्णन है।
ग्रंथकार: ज्ञात नहीं
अध्याय: 5