श्रीरामगीता
इसमें युक्तियुक्त विवेचन द्वारा आत्मज्ञान को ही विशुद्ध ज्ञान बताकर समस्त इन्द्रियों को विषयों से निवृत्त करके आत्मानुसन्धानहेतु प्रेरित किया गया है। विवेच्य सामग्री गूढ़ वेदान्तिक होते हुए भी सहज तथा सारगर्भित है।
ग्रंथकार: व्यास
अध्याय: 1