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श्रीरामगीता Book Cover

श्रीरामगीता

इसमें युक्तियुक्त विवेचन द्वारा आत्मज्ञान को ही विशुद्ध ज्ञान बताकर समस्त इन्द्रियों को विषयों से निवृत्त करके आत्मानुसन्धानहेतु प्रेरित किया गया है। विवेच्य सामग्री गूढ़ वेदान्तिक होते हुए भी सहज तथा सारगर्भित है।
ग्रंथकार: व्यास
अध्याय: 1
शास्त्र परिचय
पुराणेतिहास ग्रन्थों में कई रामगीताएँ पायी जाती हैं। प्रत्येक में वक्ता भगवान् श्रीराम ही हैं, परंतु श्रोता तथा प्रतिपाद्य-विषय भिन्न-भिन्न है। अध्यात्मरामायण के उत्तरकाण्ड के पंचम सर्ग के रूप में एक रामगीता प्राप्त होती है। सीता-वनवास प्रसंग के अनन्तर एक बार जब लक्ष्मणजी ने भगवान् श्रीरामचन्द्रजी से अज्ञानरूपी सागर को पार कराने वाले ज्ञानोपदेश देने की प्रार्थना की, तब श्रीरघुनाथजी ने उनको जो उपदेश दिया, वही 'रामगीता' कहलाती है। इसमें युक्तियुक्त विवेचन द्वारा आत्मज्ञान को ही विशुद्ध ज्ञान बताकर समस्त इन्द्रियों को विषयों से निवृत्त करके आत्मानुसन्धानहेतु प्रेरित किया गया है। विवेच्य सामग्री गूढ़ वेदान्तिक होते हुए भी सहज तथा सारगर्भित है। इस रामगीता को यहाँ सानुवाद प्रस्तुत किया जा रहा है।
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