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पुत्रगीता Book Cover

पुत्रगीता

प्रत्येक मनुष्य का जीवन क्षणभंगुर है, मृत्यु कभी भी बिना पूर्व-सूचना के आ सकती है, अतः प्रत्येक अवस्था में संसार की आसक्ति से बचकर धर्माचरण तथा सत्यव्रत का पालन करते रहना चाहिये, यही परम-साधन इस पुत्रगीता में बताया गया है।
ग्रंथकार: व्यास
अध्याय: 1
शास्त्र परिचय
महाभारत के शान्तिपर्व में भीष्म-युधिष्ठिर संवाद के अन्तर्गत पुत्रगीता के रूप में एक प्राचीन आख्यान आता है, जिसमें सदा वेद-शास्त्रों के अध्ययन में तत्पर रहने वाले एक ब्राह्मण को उनके मेधावी नामक तत्त्वदर्शी पुत्र द्वारा ही बहुत मार्मिक उपदेश दिये गये हैं। प्रत्येक मनुष्य का जीवन क्षणभंगुर है, मृत्यु कभी भी बिना पूर्व-सूचना के आ सकती है, अतः प्रत्येक अवस्था में संसार की आसक्ति से बचकर धर्माचरण तथा सत्यव्रत का पालन करते रहना चाहिये, यही परमसाधन इस पुत्रगीता में बताया गया है। अत्यन्त प्रभावी ढंग से चेतावनी देने वाली यह पुत्रगीता यहाँ सानुवाद प्रस्तुत की जा रही है।
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