पुत्रगीता
प्रत्येक मनुष्य का जीवन क्षणभंगुर है, मृत्यु कभी भी बिना पूर्व-सूचना के आ सकती है, अतः प्रत्येक अवस्था में संसार की आसक्ति से बचकर धर्माचरण तथा सत्यव्रत का पालन करते रहना चाहिये, यही परम-साधन इस पुत्रगीता में बताया गया है।
ग्रंथकार: व्यास
अध्याय: 1