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प्रत्यभिज्ञाहृदयम Book Cover

प्रत्यभिज्ञाहृदयम

यह ग्रंथ प्रत्यभिज्ञा प्रणाली के मुख्य सिद्धांतों को सूत्रों के एक संक्षिप्त सेट में स्पष्ट करता है, दर्शन के मूल को स्पष्ट करता है और बताता है कि कैसे आत्म-पहचान भीतर उत्पन्न होती है, जो 'शिवोहम' (मैं शिव हूँ) की चेतना में परिणत होती है।
ग्रंथकार: क्षेमराज
अध्याय: 1
शास्त्र परिचय
प्रत्यभिज्ञाहृदयम ('आत्म-पहचान का हृदय') कश्मीरी दार्शनिक राजनक क्षेमराज द्वारा लिखित ग्यारहवीं शताब्दी का एक ग्रंथ है। यह ग्रंथ प्रत्यभिज्ञा प्रणाली के मुख्य सिद्धांतों को सूत्रों के एक संक्षिप्त सेट में स्पष्ट करता है, दर्शन के मूल को स्पष्ट करता है और बताता है कि कैसे आत्म-पहचान भीतर उत्पन्न होती है, जो 'शिवोहम' (मैं शिव हूँ) की चेतना में परिणत होती है। प्रत्यभिज्ञाहृदयम में 20 सूत्र और स्वयं क्षेमराज द्वारा एक टिप्पणी शामिल है। इसे कश्मीर शैव धर्म का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है।
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