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प्रणव Book Cover

प्रणव

प्रणवोपनिषद् एक लघु उपनिषद् है जो "ॐ" (प्रणव) के आध्यात्मिक रहस्य और उसके ध्यान का वर्णन करता है। इसमें बताया गया है कि प्रणव अर्थात् ॐ ही परम ब्रह्म का प्रतीक है और समस्त वेदों तथा उपनिषदों का सार इसी में निहित है।
ग्रंथकार: ज्ञात नहीं
अध्याय: 1
शास्त्र परिचय
प्रणवोपनिषद् एक लघु उपनिषद् है जो "ॐ" (प्रणव) के आध्यात्मिक रहस्य और उसके ध्यान का वर्णन करता है। इसमें बताया गया है कि प्रणव अर्थात् ॐ ही परम ब्रह्म का प्रतीक है और समस्त वेदों तथा उपनिषदों का सार इसी में निहित है। उपनिषद् के अनुसार ॐ के तीन अक्षर — अ, उ, म — क्रमशः सृष्टि, पालन और संहार के सिद्धान्तों का प्रतिनिधित्व करते हैं तथा जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति अवस्थाओं से भी सम्बन्ध रखते हैं। इन तीनों से परे जो मौन अवस्था है, वह तुरीय है, जो शुद्ध ब्रह्मस्वरूप का बोध कराती है। इस उपनिषद् में प्रणव के जप, ध्यान और चिन्तन को आत्मज्ञान तथा मोक्ष का श्रेष्ठ साधन बताया गया है। साधक जब ॐ के वास्तविक स्वरूप का अनुभव कर लेता है, तब वह अपने आत्मस्वरूप और परम ब्रह्म की एकता को जानकर जन्म-मृत्यु के बन्धन से मुक्त हो जाता है। संक्षिप्त सार प्रणवोपनिषद् ॐ (प्रणव) के गूढ़ आध्यात्मिक अर्थ का विवेचन करता है और सिखाता है कि प्रणव का ध्यान एवं साक्षात्कार ही आत्मज्ञान तथा ब्रह्मप्राप्ति का मार्ग है।
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