पिंगलागीता
पिंगलागीता महाभारत के शान्तिपर्व के अन्तर्गत पितामह भीष्य एवं धर्मराज युधिष्टिर के संवादरूप में प्राप्त होती है। उसमें धन-सम्पत्ति के नष्ट होने अथवा किसी प्रियजन की मृत्यु होने पर उत्पन्न शोक के निवारण का उपाय एक प्राचीन आख्यान के माध्यम से बताया गया है।
ग्रंथकार: व्यास
अध्याय: 1