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पिंगलागीता Book Cover

पिंगलागीता

पिंगलागीता महाभारत के शान्तिपर्व के अन्तर्गत पितामह भीष्य एवं धर्मराज युधिष्टिर के संवादरूप में प्राप्त होती है। उसमें धन-सम्पत्ति के नष्ट होने अथवा किसी प्रियजन की मृत्यु होने पर उत्पन्न शोक के निवारण का उपाय एक प्राचीन आख्यान के माध्यम से बताया गया है।
ग्रंथकार: व्यास
अध्याय: 1
शास्त्र परिचय
पिंगलागीता महाभारत के शान्तिपर्व के अन्तर्गत पितामह भीष्य एवं धर्मराज युधिष्टिर के संवादरूप में प्राप्त होती है। उसमें धन-सम्पत्ति के नष्ट होने अथवा किसी प्रियजन की मृत्यु होने पर उत्पन्न शोक के निवारण का उपाय एक प्राचीन आख्यान के माध्यम से बताया गया है। आख्यान में शोकाकुल राजा सेनजिवृ को एक हितैषी ब्राह्मण ने युक्तियों के माध्यम से बहुत मार्मिक तथा प्रभावी उपदेश दिये हैं। इसी क्रम में पिंगला नामक एक गणिका का भी वर्णन आया है, जो निराशा के कारण विरक्त होकर परमसुख को प्राप्त हो गयी थी। इसी प्रसंग के कारण इसे पिंगलागीता कहा जाता है। यह गीता यहाँ सानुवाद प्रस्तुत की जा रही है।
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