परमहंसगीता
इसमें परमहंस अवस्था में विचरण करते परमज्ञानी ब्राह्मण भरत की सिन्धुनरेश रहूगण से भेंट होने तथा उनके द्वारा राजा को दिये गये गूढ़ तात्त्विक उपदेशों का वर्णन है। इस गीता में दस इन्द्रियाँ तथा अहंकार - ये ग्यारह वृत्तियाँ मन की बतायी गयी हैं, जो माया के वशीभूत होकर सुख-दुःख का अनुभव कराती हैं।
ग्रंथकार: व्यास
अध्याय: 5