निर्वाण
यह उपनिषद् ऋग्वेद से सम्बद्ध है। इसमें जीवन के परमलक्ष्य तथा आवागमन से मुक्त होने के साधनभूत 'निर्वाण' के विषय में विशद विवेचन प्रस्तुत किया गया है। इस उपनिषद् में सूत्रात्मक पद्धति द्वारा परमहंस संन्यासी के गूढ़ सिद्धान्तों को रहस्यात्मक ढंग से विवेचित किया गया है।
ग्रंथकार: ज्ञात नहीं
अध्याय: 1