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मंत्रिका Book Cover

मंत्रिका

मांत्रिक उपनिषद् एक लघु उपनिषद् है जो मुख्यतः मन, आत्मा, ब्रह्म और योग के रहस्यों का वर्णन करता है। इसमें बताया गया है कि समस्त जगत का मूल कारण एक ही परम ब्रह्म है, और जीव की मुक्ति उसी ब्रह्म के साक्षात्कार से होती है।
ग्रंथकार: ज्ञात नहीं
अध्याय: 1
शास्त्र परिचय
मंत्रिका (मांत्रिक) उपनिषद् एक लघु उपनिषद् है जो मुख्यतः मन, आत्मा, ब्रह्म और योग के रहस्यों का वर्णन करता है। इसमें बताया गया है कि समस्त जगत का मूल कारण एक ही परम ब्रह्म है, और जीव की मुक्ति उसी ब्रह्म के साक्षात्कार से होती है। उपनिषद् के अनुसार मनुष्य का बन्धन और मोक्ष दोनों उसके मन पर निर्भर हैं। विषयों में आसक्त मन बन्धन का कारण बनता है, जबकि शुद्ध और आत्मा में स्थित मन मोक्ष का साधन बनता है। इसमें ध्यान, वैराग्य, आत्मचिन्तन तथा गुरु के मार्गदर्शन को विशेष महत्व दिया गया है। यह उपनिषद् सिखाता है कि जब साधक इन्द्रियों और मन को संयमित कर अपने वास्तविक स्वरूप का अनुभव करता है, तब वह जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर परम शान्ति और ब्रह्मानन्द को प्राप्त करता है। संक्षिप्त सार मांत्रिक उपनिषद् मन के शोधन, आत्मज्ञान और ब्रह्म के साथ एकत्व की साधना का उपदेश देता है। यह बताता है कि आत्मा और ब्रह्म वास्तव में एक ही हैं, और इस सत्य का प्रत्यक्ष अनुभव ही मोक्ष है।
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