इसमें मङ्कि नामक एक प्राचीन मुनि का रोचक एवं शिक्षाप्रद आख्यान वर्णित है, जिसके माध्यम से कामना, विशेषकर धन की तृष्णा को ही सभी दुःखों का मूल तथा कामना के त्याग को ही सुख का हेतु बताया गया है।
मङ्किगीता महाभारत के शान्तिपर्व के अन्तर्गत भीष्म-युधिष्ठिर-संवाद के क्रम में प्राप्त होती है। इसमें मङ्कि नामक एक प्राचीन मुनि का रोचक एवं शिक्षाप्रद आख्यान वर्णित है, जिसके माध्यम से कामना, विशेषकर धन की तृष्णा को ही सभी दुःखों का मूल तथा कामना के त्याग को ही सुख का हेतु बताया गया है। विषय के प्रतिपादन में दृष्टान्त के अतिरिक्त बहुत-से सबल तर्क भी उपस्थित किये गये हैं। यह मङ्किगीता यहाँ सानुवाद प्रस्तुत की जा रही है।
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