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कुमारसंभवम् Book Cover

कुमारसंभवम्

कुमारसम्भवम् (कुमार + सम्भव = जन्म) संस्कृत का एक प्रसिद्ध महाकाव्य है, जिसकी रचना कालिदास ने की। इसका मुख्य विषय कुमार (कार्तिकेय/स्कन्द) का जन्म है, जो असुर तारकासुर के वध के लिए अवतरित होते हैं।
ग्रंथकार: कालिदास
अध्याय: 17
शास्त्र परिचय
कुमारसम्भवम् (कुमार + सम्भव = जन्म) संस्कृत का एक प्रसिद्ध महाकाव्य है, जिसकी रचना कालिदास ने की। इसका मुख्य विषय कुमार (कार्तिकेय/स्कन्द) का जन्म है, जो असुर तारकासुर के वध के लिए अवतरित होते हैं। मुख्य विषय इस काव्य का केंद्र है: - शिव और पार्वती का दिव्य मिलन - तपस्या की शक्ति - धर्म की पुनः स्थापना के लिए दिव्य योजना यह दर्शाता है कि: सृष्टि के संतुलन हेतु शक्ति (पार्वती) और शिव (चेतना) का मिलन अनिवार्य है। कथानक क्रम - हिमालय का वर्णन और पार्वती का जन्म - पार्वती की शिव के प्रति सेवा - कामदेव का शिव को मोहित करने का प्रयास - कामदेव का दहन (मदनदहन) - पार्वती की कठोर तपस्या - शिव द्वारा पार्वती की परीक्षा - शिव-पार्वती विवाह (उमापरिणय) - दिव्य दाम्पत्य मिलन का वर्णन - 9–17. कुमार (कार्तिकेय) का जन्म और कार्य (बाद के सर्ग) साहित्यिक विशेषताएँ (क) भाषा और शैली - अत्यंत परिष्कृत संस्कृत भाषा - अलंकारों का उत्कृष्ट प्रयोग (उपमा, रूपक आदि) - काव्य में कोमलता और गाम्भीर्य का संतुलन (ख) चित्रण (Imagery) - प्रकृति का अद्भुत वर्णन: - हिमालय की महिमा - ऋतुओं का सौंदर्य - देवताओं और भावनाओं का सजीव चित्रण (ग) रस - श्रृंगार रस (मुख्य) — शिव-पार्वती प्रेम - वीर रस — कुमार का उद्देश्य - करुण रस — रति का विलाप दार्शनिक पक्ष - तप बनाम काम: कामदेव का दहन → इन्द्रिय-नियंत्रण की श्रेष्ठता - शिव-शक्ति का मिलन: सृष्टि का मूल सिद्धांत - आध्यात्मिक उन्नति: पार्वती की तपस्या आदर्श रूप में
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