कौषीतकिब्राह्मण
कौषीतकि ब्राह्मण को शांखायन ब्राह्मण भी कहते हैं। इसकी रचना का श्रेय शंखायन अथवा कौषीतकि को जाता है। कौषीतकि शंखायन के गुरु थे। अतः शंखायन ने अपने गुरु के नाम पर इसका नामकरण किया। यह ऋग्वेद की वाष्कल शाखा से सम्बन्धित है। यह 30 अध्यायों में विभक्त है और इसमें 226 खण्ड हैं। इस ग्रन्थ में अन्य ब्राह्मण ग्रन्थों की भांति मानवीय आचार के नियम और निर्देश दिए गए हैं।
ग्रंथकार: ज्ञात नहीं
अध्याय: 4