प्राचीन काल में हारीत मुनि ने मुमुक्षु पुरुष के प्रधान कर्तव्यों से सम्बद्ध जो उपदेश दिये थे, उन्हीं का परिचय शरशय्या पर लेटे पितामह भीष्म द्वारा युधिष्ठिर को दिया गया था।
प्राचीन काल में हारीत मुनि ने मुमुक्षु पुरुष के प्रधान कर्तव्यों से सम्बद्ध जो उपदेश दिये थे, उन्हीं का परिचय शरशय्या पर लेटे पितामह भीष्म द्वारा युधिष्ठिर को दिया गया था। यह वर्णन महाभारत के शान्तिपर्व में प्राप्त है, इसी को 'हारीतगीता' कहते हैं। इस लघुकाय गीता में मुख्यतः संन्यासी के आचरण एवं कर्तव्यों का वर्णन है। इसकी भाषा अत्यन्त सरल, सुबोध तथा सारगर्भित है। संन्यासियों के लिये प्रकाशस्तम्भ सदृश यह हारीतगीता यहाँ सानुवाद प्रस्तुत की जा रही है।
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